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Women In Sports: स्पोर्ट्स में बेटियां बढ़ा रही हैं देश की शान, ये आंकड़े दे रहे गंवाही… – Aaj Tak

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बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान की फिल्म दंगल का डायलॉग ‘म्हारी छोरियां, छोरों से कम है के’ काफी वायरल हुआ था. इस फिल्मी डायलॉग ने कई स्तर पर प्रेरणा दीं, यही कारण है कि आज देश में स्पोर्ट्स के क्षेत्र में महिलाओं की भागेदारी काफी ज्यादा बढ़ गई है.  महिलाओं की भागेदारी को लेकर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने ट्वीट में एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “क्या ओलंपिक खेलों में भारत की ओर से महिला एथलीटों की भागीदारी बढ़ी है? इसका उत्तर है ‘हां’
क्या कहता है आंकड़ा? 

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीते 5 वर्षों में महिला एथलीटों की संख्या में ख़ासा इजाफा देखने को मिला है. यह संख्या इसलिए बढ़ी है क्योंकि अब महिलाओं को स्थानीय-मंडल और जिला स्तर पर उच्च स्तरीय कोचिंग सुविधाएं और संसाधन मिल रहे हैं. खेल मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 से 2020 की अवधि में खेलो इंडिया गेम्स में महिला एथलीटों की भागीदारी में कुल 160% की वृद्धि हुई है.
बीते कुछ वर्षों की बात करें तो ओलंपिक में भारत की ओर से भाग लेने वाली महिला एथलीटों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. ओलंपिक डेटाबेस के अनुसार, वर्ष 2000 में ओलंपिक खेलों में कुल 38% महिलाओं की भागीदारी देखी गई, साथ ही 2004 में यह आंकड़ा बढ़कर 40% और वर्ष 2008 में 42% हो गया. वर्ष 2012 में यह आंकड़ा 44% पर, 2016 में 45% और वर्ष 2020 में 3% की छलांग के साथ यह आंकड़ा 47% हुआ.
 
सरकारी योजनाओं की क्या भूमिका?
महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार कई पहल कर रही है, जिससे महिला खिलाड़ियों को घरेलू और वैश्विक स्तर पर उम्दा प्रदर्शन करने में मदद मिली है. टॉप्स और खेलो इंडिया जैसी योजनाओं से एथलीटों को मदद मिली है, जिसे अलग-अलग मंत्रालयों की मदद से पहुंचाया जाता है.
इसी दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए महिला और बाल विकास मंत्रालय और युवा मामले और खेल मंत्रालय ने पहली बार संयुक्त रूप से महिलाओं की भागीदारी पर ध्यान केंद्रित करने वाली पहल की घोषणा की. 2021 में एक ऑनलाइन ट्रेनिंग प्रोग्राम की शुरुआत की गई. इसे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और फिट इंडिया का एक्सटेंशन माना गया.
TOPS स्कीम से महिला एथलीट कर रहीं टॉप
भारत सरकार की एक और पहल TOPS, इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. TOPS (टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम) केंद्र सरकार की एक पहल है जो व्यक्तिगत वित्तीय बाधाओं के बावजूद खिलाड़ियों को अपना खेल जारी रखने में मदद करती है. TOPS के तहत, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए संभावित पदक विजेताओं को अनुकूलित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है. वर्ष 2014 में लागू की गई यह नीति महिला एथलीटों को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर अच्छा प्रदर्शन करने में ख़ासा मदद कर रही है.
 
टॉप स्कीम का लाभ किस पदक विजेता महिला को मिला?
 
गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल में चक्काफेंक में कांस्य पदक जीतने वाली नवजीत कौर ढिल्लों, डिस्कस थ्रोअर सीमा पूनिया, हैवीवेट पूनम यादव और एथलीट हीमा दास टॉप्स स्कीम का हिस्सा हैं. वर्ष 2021 में मंगलूर में आयोजत महिला सीनियर राष्ट्रीय भारोत्तोलन चैम्पियनशिप में 63 किलो वर्ग में राष्ट्रीय रिकार्ड बनाने वाली राखी हलधर भी टॉप्स स्कीम का हिस्सा हैं. हरियाणा की गोल्फर दीक्षा डागर 2017 ग्रीष्मकालीन डिफ्लिम्पिक्स में रजत पदक विजेता हैं और पिछले साल ओलंपिक खेलों में 50वें स्थान पर रहीं, वे भी टॉप्स का हिस्सा हैं.
 
2003 से 2005 तक बॉक्सिंग में तीन बार के ऑल इंडिया नेशनल यूनिवर्सिटी चैम्पियन रहे हरियाणा के भूपेंदर दलाल कहते हैं कि इसका सारा श्रेय सरकार और देश में खेलों के प्रति लोगों की जागरूकता को जाता है, वे कहते हैं कि अब पेरेंट्स की सोच भी बदली है, अगर हम 1995 से 2005 का समय देखें, तो ज्यादातर अभिभावक अपने ही बच्चों को सपोर्ट नहीं करते थे, लेकिन अब समय बदल गया है. अब लड़कियों को पढ़ाई लिखाई के अलावा खेल की तरफ भी सपोर्ट किया जा रहा है.
 
संसाधनों की उपलब्धता ने की है मदद
 

भूपेंदर कहते हैं कि अब महिला एथलीटों के पास संसाधन भी हैं और कोचिंग स्टाफ भी है. वे बताते हैं कि पहले जब किसी मुक्केबाज के दस्ताने ख़राब हो जाते थे या फट जाते थे, तो उनका रिप्लेसमेंट इतनी जल्दी नहीं होता था, लेकिन आज आपको तुरंत ही रिप्लेसमेंट मिल जाता है. पहले के समय में दस्ताने अगर 10 जोड़ी होते थे, तो प्रैक्टिस करने वाले एथलीटों की संख्या 20 होती थी. इसके अलावा कोई ख़ास बजट भी नहीं होता था खेलों का, लेकिन अब राज्य और केंद्र दोनों सरकारें खेल को प्रोत्साहित कर रही हैं.  
 
खेलों में आई टेक्नोलॉजी के विषय पर बात करते हुए भूपेंदर कहते हैं कि अब का सिस्टम काफी मजबूत है, अगर आप (वर्ष 1995 से लेकर 2005 तक) पहले के जिला/राज्य स्तरीय मुकाबलों को देखें, तो वहां पेन-पेपर से ज्यादातर ट्रायल्स में परिणाम घोषित किये जाते थे, लेकिन अब हर ट्रायल में वीडियोग्राफी की सुविधा उपलब्ध है, इससे चीटिंग की संभावना न के बराबर है. रिकॉर्डिंग के उपलब्ध होने से अब एथलीट ऑब्जेक्शन कर सकते हैं. टेक्नोलॉजी ने हर स्तर पर खेलों में सुधार किया है.
 
ओलंपिक में इन महिला एथलीटों ने दिखाई नारी शक्ति
 
2021 ओलम्पिक के डिस्कस थ्रो फाइनल में पहुंचने वाली कमलप्रीत कौर, सिल्वर पदक विजेता वेटलिफ्टर मीराबाई चानू, कांस्य पदक विजेता बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन और कांस्य पदक विजेता शटलर पीवी सिंधु के प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि भारत कि नारी शक्ति भी किसी से कम नहीं है. अगर इंटरनेशनल रिकॉर्ड की बात करें तो 1951 से अप्रैल 2020 तक अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने कुल 698 पदक जीते हैं. इनमें से भारतीय महिला एथलीटों ने एथलेटिक्स में सर्वाधिक 156, निशानेबाजी में 137 और कुश्ती में 73 पदक जीते हैं. इसके अलावा बैडमिंटन में (70), तीरंदाजी (65), बॉक्सिंग (45) और हॉकी (10) में भी भारतीय महिलाओं का दबदबा रहा.
  
अगर बात एशियन गेम्स की हो तो 1951 से लेकर वर्ष 2019 तक भारतीय महिलाओं ने कुल 201 स्वर्ण, 240 रजत और 257 कांस्य पदक जीते हैं. इसके अलावा राष्ट्रमंडल खेलों में भी नारी शक्ति शीर्ष पर है. इन खेलों में भारतीय महिला एथलीटों ने 58 स्वर्ण, 61 रजत और 38 कांस्य पदक जीते हैं. भारतीय महिलाओं ने वर्ष 1951 में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय पदक जीता था. 
 
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