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रेलवे में टिकट घोटाला अब थर्मल प्रिंटर से लगेगी ब्रेक लंबी दूरी की टिकटें बनाने का खेल होगा बंद.. – दैनिक जागरण (Dainik Jagran)

अंबाला रेल मंडल (Ambala Railway Division) में ब्लैंक टिकट निकालकर लंबी दूरी की टिकटें निकालने के खेल का दैनिक जागरण ने किया था पर्दाफाश। उत्तर रेलवे के अंबाला दिल्ली मुरादाबाद फिरोजपुर और लखनऊ मंडल के लिए मंगवाए गए हैं थर्मल प्रिंटर।

अंबाला, [दीपक बहल]। रेलवे में बहुत जल्द अनरिजर्व टिकटिंग सिस्टम (यूटीएस) से ब्लैंक टिकट निकालकर लंबी दूरी की टिकटें बनाने का खेल बंद हो जाएगा। इसके लिए रेल मंत्रालय डाट मैट्रिक्स की जगह थर्मल प्रिंटर लगाने की तैयारी में है। देशभर में सभी यूटीएस काउंटरों पर थर्मल प्रिंटर लगेंगे। उत्तर रेलवे ने पहले चरण में 1100 थर्मल प्रिंटर मंगवाने की तैयारी की है।
ये मंडल शामिल
ये प्रिंटर अंबाला, दिल्ली, मुरादाबाद, लखनऊ और फिरोजपुर मंडल में लगाए जाएंगे। इस थर्मल प्रिंटर से जहां कर्मचारी ब्लैंक टिकट निकालकर खेल नहीं कर पाएंगे। वहीं, सैकेंडों में यात्रियों को टिकट मिल जाएगी, जिससे समय भी बचेगा। हाल ही में उत्तर रेलवे की विजिलेंस को प्रिंटरों से ब्लैंक टिकट निकालकर लंबी दूरी की टिकट बनाने के मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया है।

दैनिक जागरण ने उठाया था मुद्दा
बता दें कि दैनिक जागरण ने रेलवे में टिकट घोटाला : ब्लैंक टिकट को लंबी दूरी की बनाकर कर्मचारी कर रहे थे फर्जीवाड़ा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। यह घोटाला कैसे किया जा रहा है, इसको जांचने के लिए उत्तर रेलवे के चीफ कामर्शियल मैनेजर (पैसेंजर एवं मार्किटिंग), प्रिंसिपल चीफ कामर्शियल मैनेजर, चीफ कामर्शियल मैनेजर (पैसेंजर एंड सर्विस) नई दिल्ली स्टेशन गए थे। विजिलेंस और क्रिस के अधिकारियों ने देखा कि यूटीएस से कैसे लंबी दूरी की फर्जी टिकट बना दी जाती है।

इस तरह से होता था खेल
इसमें पता चला कि रेल कर्मी ब्लैंक टिकट निकालते थे। जब ब्लैंक टिकटें निकाली जाती थीं तो कार्टेज को हटा लेते थे और यूटीएस से एक स्टेशन से दूसरे निकट के स्टेशन की कमान दे दी जाती। इस टिकट का किराया रेलवे के खजाने में जमा हो जाता, जबकि बाद में यदि कोई लंबी दूरी तय करने वाला यात्री आता तो इस ब्लैंक टिकट का इस्तेमाल कर लिया जाता, जिसमें रेलवे का कार्बन काफी मददगार साबित होता।

यह होता है थर्मल प्रिंटर
थर्मल प्रिंटर में विशेष प्रकार के कागज का प्रयोग होता है। इसमें स्याही, टोनर या रिबन नहीं होता। थर्मल प्रिंटर में प्रिंटहेड एक रिबन पर गर्म होकर प्रिंटिंग करता है। मल्टीप्लेक्स में मिलने वाली सिनेमा आदि की टिकट की प्रिंटिंग इसी प्रिंटर से होती है। थर्मल प्रिंटर को बीच में रोकना या इसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ संभव नहीं है। कई थर्मल प्रिंटर ऐसे होते हैं, जिनमें बैकअप बैटरी लगती है, जो पावर कट में भी काम करते हैं। इस थर्मल प्रिंटर के माध्यम ये जो भी प्रिंट लिया जाता है, उसमें फर्जीवाड़ा नहीं किया जा सकता।

"रेलवे अब थर्मल प्रिंटर का इस्तेमाल टिकट बनाने के लिए करेगा। यह मौजूदा प्रिंटर से कहीं अपडेट है। इसका प्रयोग करने से समय में भी बचत होगी।"
– हरिमोहन, सीनियर डीसीएस, रेल मंडल अंबाला

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