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भीगते हुए स्टेडियम और जिम जाता था जिससे अभ्यास नहीं छूटे कुलदीप सेन.. – दैनिक जागरण (Dainik Jagran)

IPL 2022 कुलदीप सेन ने कहा कि पहले तो क्रिकेट खेलने पर बहुत डांट पड़ती थी लेकिन अभी ठीक है। अभी घर वालों को भी अच्छा लगता है जब लोग उन्हें बोलते हैं कि लड़का अच्छा कर रहा है।

राजस्थान रायल्स के तेज गेंदबाज कुलदीप सेन ने लखनऊ सुपरजाइंट्स के खिलाफ पिछले मैच में अपनी टीम को अंतिम ओवर में जीत दिलाकर सुर्खियां बटोरीं। लखनऊ को आखिरी ओवर में जीत के लिए 15 रन की जरूरत थी लेकिन कुलदीप ने अपनी गेंदबाजी से मार्कस स्टोइनिस को रोका और उनकी टीम ने तीन रन से जीत दर्ज की थी। मध्य प्रदेश के रीवा में रहने वाले कुलदीप के पिता सैलून चलाते हैं। जब वह अंडर-25 टीम में नहीं चुने गए तो अभ्यास करने के लिए बारिश में भीगते हुए भी जाते थे जिससे उनकी तैयारी खराब नहीं हो। राजस्थान ने मेगा नीलामी में 20 लाख रुपये में कुलदीप को अपने साथ जोड़ा था। अभिषेक त्रिपाठी ने कुलदीप सेन से की खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश :

-पहले घर वाले कहते थे कि क्रिकेट मत खेलो, अब क्या कहते हैं?
-पहले तो क्रिकेट खेलने पर बहुत डांट पड़ती थी लेकिन अभी ठीक है। अभी घर वालों को भी अच्छा लगता है जब लोग उन्हें बोलते हैं कि लड़का अच्छा कर रहा है। वही बोलते हैं कि जो तुमने सोचा था और तुम वही कर रहे हो तो बस लगे रहना है। जो भी करो अच्छा करो और ज्यादा सोचो मत।
-आपके पापा ने कहा था कि उन्होंने आपको क्रिकेट खेलने पर मारा भी है। अब आप उनको किस तरह की जिंदगी देना चाहते हैं? क्या उन्हें अब सैलून चलाने देंगे?

-मैंने उनको कभी काम करने से मना नहीं किया है। जिस काम से हमारा का घर चला है तो मैं उनको कभी भी नहीं रोकने वाला हूं। उनका जैसा मन करे, वह वैसा करें। उन्होंने डांटा है थोड़ा बहुत और यह कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि सभी के माता-पिता ऐसा करते हैं। यह अच्छा भी था क्योंकि इससे सीखने को मिलता था कि खेलना है तो अच्छे से खेलना है। अब बस यही है कि अपने परिवार को अच्छे से रखूं और उनको बेहतर से बेहतर सुविधाएं दे सकूं।

-अपने संघर्ष भरे सफर के बारे में बताएं?
— एक चीज है जो मैंने किसी को नहीं बताई है, आपको बताने जा रहा हूं। मैं अंडर-19 खेला था और अंडर-25 के लिए एक साल मेरा चयन नहीं हुआ। मेरे पास पैसे भी नहीं थे और काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मैं स्टेडियम भी नहीं जा पाता था। मैं चोटिल भी हुआ और इससे उबरा भी और दो-तीन चार महीने मुझे रुटीन में आने में लगे। इसके बाद मैंने ऐसा रुटीन बनाया जिससे एक दिन भी ट्रेनिग और अभ्यास नहीं छूटे। सुबह बरसात होती थी तो मैं भीगते हुए स्टेडियम जाता था। मैं बाइक से स्टेडियम जाता और रनिंग करके आता। मेरा घर शहर से दूर था लेकिन मैं फिर भी जिम जाता था क्योंकि मुझे पता था आज मैं संघर्ष करूंगा तो आगे मुझे फायदा मिलेगा। मैं भीगते हुए दो कपड़े लेकर जिम जाता था। मैं शुक्रगुजार हूं कि जिम वाले का जिसने मुझे आजतक फीस के लिए नहीं बोला। उनका कहना था आप आओ, जिम करो भले ही पैसे मत देना कोई दिक्कत नहीं है। मैंने उस दौरान कभी कोई ट्रेनिंग मिस नहीं की। वो साल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा। मेरी चोट ज्यादा बड़ी नहीं थी लेकिन वित्तीय रूप से परेशानी थी और मैंने कई लोगों से उधार भी लिए थे। लेकिन धीरे-धीरे मेरे क्रिकेट खेलने के लिए जो पैसे लगते थे उसका जुगाड़ होने लग गया था।

– आइपीएल सत्र के बाद अपने जिम वाले के पास वापस जाओगे?
-बिलकुल जाऊंगा। मैं जब भी फ्री होता हूं तो जाता हूं। रीवा में ऐसी दो जिम है जिन्होंने मेरा सहयोग किया है। समय मिलता है दोनों जगह में से कहीं भी चला जाता हूं।
-अभी आपके पास कोई नौकरी है?
-हां, अभी मैं भारत सरकार का कर्मचारी हूं। मेरी हाल ही में नौकरी लगी। आइपीएल के ट्रायल के दो-तीन बाद मुझे सीएजी की नौकरी के लिए जाना था। मैंने उसका फार्म डाला था, फिर वहां से पत्र आया कि आपको ट्रायल के लिए आना है। उसके बाद राजस्थान रायल्स से भी फोन आया कि आपको ट्रायल पर आना है। मेरे पास विकल्प यही था कि या तो मैं इधर जाऊं या मैं नौकरी के लिए जाऊं। मैंने फैसला किया कि पहले राजस्थान के ट्रायल्स के लिए जाऊंगा फिर सरकारी नौकरी के लिए जाऊंगा। राजस्थान के ट्रायल पर आया तो मेरे को मालूम चला कि 12-14 घंटे का ट्रायल होगा। मैं जैसे ही कमरे में आया तो मेरे पास फोन आया कि आपको तुरंत आना है गेंद फेंकने के लिए। मैं थकान में गया और मैंने गेंदबाजी की। दिन खत्म होने के बाद सभी ने कहा अच्छा है और बहुत बढि़या गेंदबाजी की। मुझे सकारात्मक सोच मिली। उधर से मैं फिर ग्वालियर के लिए गया और नौकरी के ट्रायल्स में मैंने फिटनेस टेस्ट दिया। तीन लोगों को नौकरी पर लेना था और मैं तीसरा व्यक्ति था जिसे यह नौकरी मिली।

-आपके पिता नाई हैं। आप क्रिकेट में कैसे आए और गेंदबाज क्यों बने? बल्लेबाज क्यों नहीं?
-पापा का सैलून है। हमारी ऐसी दो दुकाने हैं। एक में चाचा और एक में पापा काम करते हैं। परिवार इसी पर निर्भर है। मैं अपने मोहल्ले में जब खेलता था तो गेंदबाजी ही करता था। मुझे गेंदबाजी करना पसंद था क्योंकि मैं तेज गेंद डालता था और सब आउट हो जाते थे। सब बोलते थे आराम से गेंद डाला कर। जब स्टेडियम में आया तो मैंने एरिल एंथनी सर से कहा कि मैं बल्लेबाजी भी कर लेता हूं लेकिन सर ने कहा कि तुम्हारी लंबाई अच्छी है और तुम गेंदबाजी करो और मैं बताता रहूंगा तो उस हिसाब से इसमें सुधार भी करना।

– आपके कोच एंथनी ने आपके एक्शन को सुधारने के लिए चार साल लगाए?
— हां, जिस साल मैं आया था और अगले साल भी उन्होंने मेरी गेंदबाजी देखी। मुझे एक्शन बेहतर करने के बारे में बताया। मैं हर समय लगा भी रहता था। सर कहते थे कि अगर तुम्हें सुधार करना है तो थोड़ा अलग से भी करना पड़ेगा। मैं धीरे-धीरे खेलता गया और फिर उन्होंने और बताया। सर कहते थे ज्यादा चीजों में घुसने की जरूरत नहीं है, बस गेंदबाजी अच्छी होनी चाहिए।

– नीलामी के दौरान लगा कि टीम आपको चुनेगी?
-मुझे नहीं लगा था कि ऐसा कुछ होगा लेकिन ट्रायल अच्छा हुआ था तो एक उम्मीद थी। मैं मुंबई इंडियंस के ट्रायल पर भी गया था। वहां भी अच्छी गेंदबाजी की थी। दो-तीन फ्रेंचाइजी और थी जहां से मेरे पास ट्रायल के लिए फोन आया था लेकिन मैं जा नहीं पाया था। मुझे उस वक्त लगा कि शायद कोई टीम मुझे ले लेकिन यह नहीं पता था कि राजस्थान लेगी। नीलामी के दिन रणजी ट्राफी चल रही थी और हमारी टीम मीटिंग थी। दो बजे के आसपास मेरा नाम आया तो उस वक्त मैं बिक नहीं पाया था। मीटिंग खत्म होने के बाद कुछ लोगों के फोन आए कि तुम्हें अभी लिया नहीं है लेकिन हो सकता है कि बाद में लें। मैं ऐसे ही फिर नीलामी देखता रहा लेकिन शाम को मेरा नाम जब आया तो बहुत अच्छा लगा। सभी दोस्तों ने मुझे गले लगा लिया।

-राजस्थान रायल्स से जुड़ने के सफर के बारे में बताएं?
— बहुत अच्छा लग रहा है। यहां ज्यादा दबाव नहीं है। कोच और सभी खिलाड़ी अच्छे हैं। संजू भइया हमारे कप्तान हैं, वह कूल व्यक्ति हैं और काफी समर्थन करते हैं। मुझे लगता है संजू भाई शांत दिमाग से सोचते हैं। वह खिलाड़ी को बैक भी बहुत करते हैं।
– राजस्थान को ऐसी टीम के तौर पर जाना जाता है जो बड़े नाम की जगह नए चेहरे लाती है और उन्हें हीरो बनाती है?

-मैंने सुना था कि राजस्थान में नए-नए लड़के आते हैं और टीम युवाओं को मौका देती है। मुझे भी बहुत अच्छा लगता कि मैं ऐसी फ्रेंचाइजी में हूं जो युवाओं को प्रमोट करती है। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैं शुक्रगुजार हूं कि मैं इन सभी के साथ खेल रहा हूं। यह मेरे लिए सपने से कम नहीं है।
– इंस्टाग्राम पर आपने अपना प्रोफाइल नाम 150 कुलदीप रखा है। इसके पीछे क्या कारण है?

— जब मैं इंस्टाग्राम एकाउंट बना रहा था तो मेरे दिमाग में चल रहा था कि क्या नाम दूं। मुझे पहले से ही तेज गेंदबाजी पसंद थी तो मैंने सोचा चलो 150 नाम डाल देता हूं। मैंने सोचा डाल देता हूं जिससे याद रहेगा कि गेंद को थोड़ा तेज डालना है।
-आप किस अंतरराष्ट्रीय तेज गेंदबाज को पसंद करते हैं?
-मैं डेल स्टेन का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। वह जिस तरह तेज गेंद डालते और स्विंग कराते थे, मुझे यह सब बहुत पसंद है। मैं शुरुआत से ईश्वर पांडे को भी पसंद करता हूं लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्टेन पसंद हैं।
– गेंदबाजी में किस विभाग में खुद को और विकसित करना चाहते हैं?
-मैं यार्कर पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करता हूं तो मैं इसे और ज्यादा विकसित करना चाहूंगा।
-पिछले मैच में स्टोइनिस के सामने आखिरी ओवर में दिमाग मे क्या चल रहा था? ऐसे ताबड़तोड़ खिलाड़ी के सामने रन नहीं बनने देने के लिए क्या योजना बनाई थी?
-स्टोइनिस जब बल्लेबाजी कर रहे थे तो मेरे दिमाग में बस यही चीज चल रही थी कि यह बड़े शाट की ओर जाएंगे क्योंकि सिंगल तो नहीं लेना चाहेंगे। मुझे ऐसी गेंद नहीं डालनी थी जिससे वह बड़ा शाट नहीं मार सकें। मैंने यार्कर डालने के बारे में सोचा। मेरी संजू सैमसन भइया से बात हुई थी तो उन्होंने कहा था कि जो तुम्हारी मजबूती से उस पर जाओ तो मैंने कहा कि स्टंप के बाहर वाली गेंद डालता हूं यार्कर। मुझे उनसे दूर ही गेंद रखनी थी और सब सही हो गया।

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